
लिखें है गम खून की शाही से
लोग समझ रहे है मामूली अशआर !
जैसे जिया है, जिंदगी को हमने
उस अंदाज़ से लिख रहे है अशआर!
न कोई मिला हमको समझ ने वाला
इस तड़प मे लिख रहे है अशआर!
न मिलो हमें यूँ रेहमत से तुम
मेरी जिंदगी है अल्फाज़ो के अशआर!
बिछड़ के जाना है एक दिन “प्रदीप “
कुछ तो लिखें होंगे बेहतरीन अशआर!
– प्रदीप शायर
Note: ” अशआर ” मतलब ( शेर, शायरी )